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सरकार ने तेल और गैस के क्षेत्र में बहुत बड़े सुधार की शुरुआत की है

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इस निर्णय में घरेलू तेल और गैस अन्वेषण को बढ़ावा देने के लिए गठित समिति की सिफारिशों को भी शामिल किया गया हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंगलवार को तेल और गैस के घरेलू अन्वेषण और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अन्वेषण और लाइसेंसिंग क्षेत्र के सुधारों पर नीतिगत ढांचे को मंजूरी प्रदान की है।

मंत्रिमंडल का यह निर्णय, घरेलू तेल और गैस अन्वेषण को बढ़ावा देने की योजना के लिए गठित एक उच्चाधिकार समिति की सिफारिशों पर आधारित था, जिसकी अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने की और इसमें कैबिनेट सचिव, सीईओ, नीति आयोग, सचिव, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सचिव, आर्थिक मामलों के विभाग और सीएमडी, ओएनजीसी भी शामिल थे। यह निर्णय, सरकार के एक मूल लक्ष्य में बदलाव का संकेत देता है, जिसका उद्देश्य अन्वेषण पर ध्यान देते हुए राजस्व-क्षमता से उत्पादन-क्षमता की ओर बढ़ना है। इससे बढ़े हुए निवेश और उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

श्रेणी I के बेसिनों में, जहां पर क्षमता स्थापित है और उत्पादन का काम चल रहा है, इन बेसिनों के अस्पष्टीकृत क्षेत्रों में आगे की खोज को बढ़ावा देने के लिए, राजस्व के बंटवारे का भार 50 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि राजस्व बंटवारे से उच्च उत्पादन का विघटन न हो सके, अधिकतम राजस्व बंटवारे को 50 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है।

इससे कम की संभावित, श्रेणी II और श्रेणी III के बेसिन में, राजस्व के साझाकरण के लिए वितरण प्रणाली को दूर कर दिया गया है और बेसिन का आवंटन पूरी तरह से अन्वेषण के कार्य के आधार पर आधारित रखा गया है। खोज की सफलता के आधार पर संचालक को उत्पादन और पूर्ण राजस्व की प्राप्ति तो होगी और जिसमें सरकार से लाभांश की कोई मांग नहीं होगी। इसे केवल विपणन और मूल्य निर्धारण की स्वतंत्रता से अलग किया गया है, जिसको सभी बेसिनों में निर्धारित भी किया गया है। केवल इस मामले में, वार्षिक राजस्व 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हुआ है इसलिए सरकार अतिरिक्त राजस्व का हिस्सा लेगी।

यह समिति की सिफारिशों, अन्वेषण और उत्पादन शासन को उदार बनाने, एनओसी के मौजूदा उत्पादक क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर ध्यान केंद्रित किया था, जिसे सभी कैबिनेट की मंजूरी मिली है।

कैबिनेट निर्णय ने तेल और गैस के उत्पादन के पूर्ण विपणन और मूल्य निर्धारण करने की स्वतंत्रता को प्रदान करने का निर्णय लिया है। गैस के क्षेत्र में, इसने उन क्षेत्रों को भी विस्तारित किया है, जिनको पहले से ही फील्ड डेवलपमेंट प्लान (एफडीपी) के लिए अनुमोदित किया जाना है। राजस्व में उनको भी छूट प्रदान की जाती है अगर वो तेल क्षेत्रों को उत्पादन से पहले प्राप्त करते हैं।

निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से, नई तकनीक, पूंजी और प्रबंधन की प्रथाओं का लाभ उठाकर नामांकित क्षेत्र की राष्ट्रीय तेल कंपनियों (एनओसी) के उत्पादन में वृद्धि की संभावना है। प्रदर्शन के मूल्यांकन के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने के आधार पर उन्हें एनओसी के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

कैबिनेट ने उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र के ऑपरेटरों को एनओसी का 66 फील्ड देने का निर्णय लिया है। इससे, एनओसी को उसके द्वारा उत्पादित किए जा रहे उत्पादन के अलावा उत्पादन में भी हिस्सेदारी मिलेगी।

यद्यपि इस नीति के माध्यम से, तेल और गैस के शीघ्र उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए एक पारदर्शी, निवेशकों के अनुकूल और प्रतिस्पर्धी नीतिगत ढांचे की खोज की गतिविधियों में तेजी लाने की परिकल्पना की गई है।

नीति आयोग की सिफारिशों को एकीकृत करते हुए, कैबिनेट का यह निर्णय अन्वेषण और उत्पादन की गतिविधियों को बढ़ाने पर केंद्रित है, जिससे समर्थक सेवाओं के विकास, रोजगार सृजन, उन्नत प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण आदि के मामले में बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ होगा।

तेल और गैस के क्षेत्र में निरंतर सुधारों को जारी रखने के लिए, व्यापार की प्रक्रियाओं को आसान बनाने और उसके अनुमोदन के तंत्र को आसान बनाने के लिए समन्वय तंत्र का निर्माण और डीजीएच के अनुमोदन के उपाय को शामिल किया गया है।

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