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उपराष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि जनजातीय क्षेत्र पर राज्यपालों की रिपोर्ट संसद और संसद समिति के समक्ष पेश की जानी चाहिए और संसदीय समिति को उनकी जांच करनी चाहिए

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उप राष्‍ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने आज राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएसटी) का पहला स्‍थापना दिवस व्‍याख्‍यान दिया। स्‍थापना दिवस व्‍याख्‍यान का विषय था ‘संविधान और जनजातियां’। एनसीएसटी की स्‍थापना संविधान (89 में संशोधन) अधिनियम के माध्‍यम से 19 फरवरी, 2004 को की गई थी। आयोग ने 31 दिसम्‍बर, 2018 को आयोजित अपनी 109वीं बैठक में उपर्युक्‍त तरीके से मनाने का निर्णय लिया था। इस अवसर पर केन्‍द्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री श्री जुआल ओराम, एनसीएसटी के अध्‍यक्ष श्री नंद कुमार साय, एनसीएसटी की उपाध्‍यक्ष श्रीमती अनुसिया उइके और एनसीएसटी के सचिव, श्री ए.के. सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

स्‍थापना व्‍याख्‍यान देते हुए उप राष्‍ट्रपति ने कहा की हमें सबसे पहले जनजातियों को पिछड़ा मानने के पूर्वाग्रह को छोड़ना होगा। प्रत्‍येक जनजाति की एक समृद्ध और जीवंत सांस्‍कृतिक परंपरा है। हमें उसका सम्‍मान करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि हमें उनकी सांस्‍कृतिक परंपराओं का सम्‍मान करना चाहिए, क्‍योंकि यह हमारी संवैधानिक मान्‍यता भी है। हम स्‍थायी विकास के तरीके खोज रहे हैं। ये समूह हमें स्‍थायी विकास के पाठ पढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया का हर जनजातीय समुदाय किसी न किसी रूप में प्रकृति की पूजा करता है। उनकी उपासना की विधियाँ भिन्न हो सकती हैं, लेकिन प्रकृति में उनकी आस्था एक समान और मजबूत है। अनेकता में एकता का इससे बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता।

श्री नायडू ने सावधान किया कि उनकी सांस्‍कृतिक पहचान की रक्षा के नाम पर उन्‍हें राष्‍ट्रीय मुख्‍य धारा से अलग – थलग नहीं करना चाहिए। तभी सबका साथ सबका विकास का वायदा पूरा किया जा सकेगा। इस संदर्भ में उप राष्‍ट्रपति ने जनधन, मुद्रा और स्‍टैंड-अप इंडिया जैसे वित्‍तीय समावेशन के लिए सरकार द्वारा उठाये गये अनेक कदमों का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने सुझाव दिया कि जनजातीय क्षेत्रों के बारे में राज्पालों की रिपोर्ट को संसद के समक्ष प्रस्‍तुत किया जाना चाहिए और उचित संसदीय समिति को उसकी जांच करनी चाहिए। उन्‍होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी  ने जनजातीय  मामलों के लिए अलग मंत्रालय और अलग राष्‍ट्रीय आयोग का गठन किया था।

इस अवसर पर उपराष्‍ट्रपति ने “जनजातीय स्वाधीनता संग्राम” नामक पुस्तक का विमोचन किया और एनसीएसटी ‘लीडरशिप अवार्ड्स’ प्रदान किये।

 

i.     कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, भुवनेश्वर: ओडिशा और आस-पास के राज्यों में केजी से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक के आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए उनके महत्वपूर्ण योगदान की मान्यता में।

ii.     सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड, रांची: झारखंड में अनुसूचित जनजाति के बच्चों में खेल को बढ़ावा देने के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान की मान्यता में।

iii.     डॉ. प्रणब कुमार सिरकार, अंडमान आदिम जनजाति विकास समिति (एएजेवीएस) में जनजातीय कल्याण अधिकारी – अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों जैसे ओंगेस, शॉम्पेंस, अंडमानी और जारवास के प्रति उनके महत्वपूर्ण योगदान की मान्यता में।

श्री जुआल ओराम ने 1999 में नये जनजातीय मामलों के मंत्रालय और 2004 में एनसीसटी के गठन में पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार देश भर के आदिवासी क्षेत्रों में विभिन्न परियोजनाओं को शुरू करने के कार्य को प्राथमिकता दे रही है।

श्री नंद कुमार साय ने अपने संबोधन में अनुसूचित जनजातियों के व्यक्तियों के कल्याण और बेहतरी के लिए एनसीएसटी के विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। श्रीमती अनुसुइया उइके ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। चूँकि किसी भी आदिवासी समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम होना परंपरा है, इसलिए स्थापना दिवस समारोह में गुजरात और राजस्थान से ‘मवेशी भील नृत्य के रूप में समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया गया।

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